सोशल फाउंडेशन ने “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस” के उपलक्ष्य में किया भाषण प्रतियोगिता का आयोजन, केएमजीजीपीजीसी की छात्राओं ने गिनाए डिजिटलीकरण के फायदे और चुनौतियां
गौतमबुद्धनगर। बादलपुर गांव में स्थित कु. मायावती राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय का सेमिनार हॉल 16 मार्च, 2026 को नारी शक्ति के विचारों से गूंज उठा। मौका था दिल्ली की सामाजिक संस्था ‘सोशल फाउंडेशन’ और महिला प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भाषण प्रतियोगिता का। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में हुई इस भाषण प्रतियोगिता का विषय ‘डिजिटलीकरण और महिलाएं : सशक्तिकरण या असुरक्षा’ पर महाविद्यालय के विभिन्न संकायों की छात्राओं ने बड़े ही उत्साह और तर्क के साथ अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसमें सभी ने एक स्वर में कहा कि महिलाओं को डिजिटलीकरण के इस दौर का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। इसके साथ ही खुद को सुरक्षित रखने पर भी ज़ोर दिया।
सोशल फाउंडेशन और कु. मायावती राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय के महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य डिजिटलीकरण तथा महिलाओं से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं से छात्राओं को अवगत कराना, महिला सशक्तिकरण के बारे में जागरूकता का प्रसार करना और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक मनाना था।
कु. मायावती राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनीता रानी राठौर के संरक्षण और महिला प्रकोष्ठ प्रभारी प्रोफेसर डॉ. ममता सागर के नेतृत्व में आयोजित इस भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रही बी.कॉम. तृतीय वर्ष की छात्रा चेतना शर्मा ने बड़े ही सधे हुए अंदाज में अपने विचार रखते हुए कहा कि ऑनलाइन दुनिया ने महिलाओं को सपने देखने और उन्हें सच करने का मंच प्रदान किया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिये आज गांव की बेटियां अपने सपनों को पूरा कर रही हैं।
दूसरे स्थान पर रही लवली शर्मा ने कहा आज का युग डिजीटल का युग है जिसने दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है, जहां महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं, वही असुरक्षा और चुनौतियों को भी बढ़ाया है।
इस प्रतियोगिता में दो छात्राओं रिया और नीतू पाल ने संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया। दोनों छात्राओं ने कहा कि बेशक डिजिटलीकरण के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी बढ़ी हैं लेकिन वर्तमान समय में डिजिटलीकरण की जरुरत को ख़ारिज नहीं किया जा सकता, ये हमारे विवेक पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं।
इस मौके पर सोशल फाउंडेशन के अध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार ने संबंधित विषय पर विचार रखने के लिए छात्राओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि 15 मार्च, 1985 का दिन इंटरनेट के इतिहास का एक अहम दिन माना जाता है। इसी दिन दुनिया का पहला ‘डॉट कॉम डोमेन’ रजिस्टर हुआ, जिसने इंटरनेट की दुनिया में एक नई क्रांति की शुरुआत की। धर्मेन्द्र कुमार ने आगे बोलते हुए कहा कि वास्तव में आज का युग डिजिटलीकरण का है, जिसमें शिक्षा, रोजगार, व्यापार और स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से सुलभ हो रही हैं। हालांकि डिजिटल क्षेत्र में भाग लेने की इच्छुक महिलाओं के लिए अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, जिनमें साक्षरता की कमी, इंटरनेट की सीमित पहुंच, साइबर सुरक्षा, खतरे और सामाजिक बाधाएं शामिल हैं।
कु. मायावती राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय की प्राचार्य अनीता रानी राठौर ने इस भाषण प्रतियोगिता में विजेता छात्राओं को सोशल फाउंडेशन की तरफ से ट्रॉफी और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही महिला प्रकोष्ठ की सदस्य प्रोफेसरों को भी भाषण प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रचार्य अनीता रानी राठौर ने अपने संबोधन में सोशल फाउंडेशन के पदाधिकारियों और महिला प्रकोष्ठ की पूरी टीम को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने छात्राओं की हौंसला अफज़ाई करते हुए कहा कि डिजिटलीकरण से आज का दौर को जितना आसान हुआ है उतना कठिन भी हुआ है, इसलिए ये जरूरी है कि हम तकनीक का उपयोग करें लेकिन साथ ही सतर्क भी रहें।
इस भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में कु. मायावती राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. ललिता, डॉ. अमर ज्योति और सोशल फाउंडेशन के महासचिव नवीन कुमार रहे, कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सोनम शर्मा ने किया।
इस कार्यक्रम में महिला प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. ममता सागर एवं समिति की सदस्य सदस्य डॉ.सीमा, डॉ. अनुपम, डॉ.रामकांती, डॉ. सोनम शर्मा, डॉ. दीपांक्षी, डॉ. दीप्ति कश्यप, डॉ. अनीता ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस मौके पर गौतमबुद्धनगर के सामाजिक कार्यकर्ता रविन्द्र कुमार भी मौजूद रहे।
ईश्वर चंद संवाददाता सहारा टीवी रुड़की उत्तराखंड
