सीएसआईआर–सीबीआरआई द्वारा “भारतीय वास्तुकला शिल्प कौशल” पर तीन दिवसीय कार्यशाला-सह-मंथन का आयोजन
सीएसआईआर –केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की ने सीएसआईआर इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव के अंतर्गत 7 से 9 जनवरी 2026 तक “भारतीय वास्तुकला शिल्प कौशल” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला-सह-मंथन का उद्घाटन किया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों विशेष रूप से युवा वास्तुकारों को भारत की पारंपरिक वास्तुकला एवम शिल्प परंपराओं से परिचित कराना तथा उन्हें सतत और कार्बन रहित आधुनिक निर्माण पद्धतियों से जोड़ना है।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत अतिथियो के स्वागत एवम दीप प्रज्वलन से हुइ। संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं आउटरीच एंड डिसेमिनेशन सर्विसेज प्रमुख, डॉ. नीरज जैन ने सभी का स्वागत करते हुए सीएसआईआर के कौशल विकास कार्यक्रमों के उद्देश्यों तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में इस कार्यक्रम की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप मे वास्तुकार एस. के. नेगी, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर–सीबीआरआई एवं पारंपरिक वास्तुकला विशेषज्ञ एवम प्रो. राम सतीश पसुपुलेटी, वास्तुकला एवं नियोजन विभाग, आईआईटी रुड़की, उपस्थित रहे जिन्होंने भारतीय पारंपरिक आवास उत्थान पुरस्कार 2.0 के विजेताओ के लिए जूरी की भूमिका निभाई थी। सीएसआईआर–सीबीआरआई के निदेशक, प्रो. आर. प्रदीप कुमार ने पारंपरिक वास्तुकला शिल्प को संरक्षित करने और आधुनिक निर्माण प्रणालियों के साथ इसके समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशाला भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए सतत एवं लचीले निर्माण को प्रोत्साहित करती हैं।
उद्घाटन सत्र के दौरान वास्तुकार अनूप कुमार प्रसाद द्वारा लिखित पुस्तक “द लिविंग क्राफ्ट ऑफ इंडियन आर्किटेक्चर” का विमोचन किया गया। इसके साथ ही भारतीय पारंपरिक आवास उत्थान पुरस्कार 2.0 के अंतर्गत पारंपरिक आवास एवं वास्तुकला शिल्प के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वास्तुकारों, वास्तुकला के विभिन्न संस्थानों के छात्रों को सम्मानित किया गया।
कार्यशाला में देशभर के विभिन्न संस्थानों से बड़ी संख्या में युवा वास्तुकारों एवं वास्तुकला के छात्रों ने भाग लिया। कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रमुख संस्थानों में पेरियार मणिअम्मई विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, वल्लम, तमिलनाडु; मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भोपाल, मध्य प्रदेश; स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA), विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश; आईईएस कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर, मुंबई, महाराष्ट्र; तथा नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (NSUT), द्वारका, दिल्ली इत्यादि शामिल रहे। जिससे उन्हें भारत की पारंपरिक निर्माण तकनीकों और शिल्प परंपराओं को समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का समापन प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. ताबिश आलम, के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ संपन्न हुआ। उद्घाटन सत्र के पश्चात तकनीकी सत्र प्रारंभ हुए जिस्मे प्रतिभागियों ने पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी एवं हिमालयी निर्माण तकनीकों पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों में भाग लेकर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन सीएसआईआर-सीबीआरआई के स्टाफ सदस्यों – श्री रजनीश, श्री नितिन, श्रीमती शिवांगी, श्री निखिल, श्री हर्ष, सुश्री राशि, सुश्री इकरा, सुश्री संस्कृति, श्री रजत, श्री अमज़द, श्री महेश, श्री अनुज, एवं श्री विकास—के मूल्यवान सहयोग से संपन्न हुआ।

ईश्वर चंद संवाददाता सहारा टीवी

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