सीबीआरआई, रुड़की में सीएसआईआर का 85वाँ स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया
सीएसआईआर के 85वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सीएसआईआर–केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को रवींद्रनाथ टैगोर सभागार में समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह में संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, निदेशक एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ. अजय चौरसिया, वैज्ञानिक ‘जी’ एवं अध्यक्ष, आयोजन समिति, सीबीआरआई, रुड़की ने सभी गणमान्य अतिथियों एवं उपस्थित जनों का स्वागत किया। उन्होंने सीएसआईआर के 85वें स्थापना दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सीएसआईआर की वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान एवं विकास में इसके योगदान तथा राष्ट्र के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानकारी दी। इसके पश्चात प्रो. आर. प्रदीप कुमार, निदेशक, सीबीआरआई ने अपने संबोधन में सीएसआईआर की स्थापना, देश के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसकी प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सीएसआईआर ने अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने तथा राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके उपरांत उन्होंने सीबीआरआई की अनुसंधान गतिविधियों, विभिन्न अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) समूहों तथा उनके द्वारा भवन निर्माण विज्ञान, संरचनात्मक सुरक्षा, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सतत निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए वसुंधरा ताल में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की पूर्व चेतावनी प्रणाली (GLOF-EWS) की सफल स्थापना, स्मार्ट विलेज पहल तथा अग्नि सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 3डी कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक के क्षेत्र में सीबीआरआई के अनुसंधान एवं विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार के DEE विभाग और सीबीआरआई के बीच हुए समझौते के माध्यम से गंटूर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G) के अंतर्गत 177 आवासों के निर्माण हेतु 3डी प्रिंटिंग तकनीक के उपयोग तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। यह पहल सुरक्षित, टिकाऊ, किफायती, तीव्र, मजबूत एवं सौंदर्यपरक भवन निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-सीबीआरआई का निरंतर प्रयास अत्याधुनिक अनुसंधान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से सुरक्षित, टिकाऊ और आपदा-प्रतिरोधी भवनों एवं अवसंरचना के विकास में योगदान देना है।
इसके पश्चात मुख्य अतिथि प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से भवन निर्माण क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने तथा सतत निर्माण सामग्री के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने “Sustainable CO₂ Capture in Safer Home Building Materials” विषय पर प्रस्तुति देते हुए बताया कि भवन निर्माण में प्रयुक्त सामग्री का जीवन चक्र आकलन (Life Cycle Assessment–LCA) कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरणीय प्रभावों को समझने तथा कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कच्चे माल के निष्कर्षण से लेकर सामग्री के निर्माण, परिवहन, भवन में उपयोग तथा उसके जीवनकाल के अंत तक विभिन्न चरणों में होने वाले कार्बन उत्सर्जन का आकलन करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को अवशोषित करने में सक्षम निर्माण सामग्री के विकास एवं उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ भवनों के निर्माण के महत्व को रेखांकित किया।
इस अवसर पर उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने तथा भवन निर्माण क्षेत्र में सतत तकनीकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर एवं सीएसआईआर-सीबीआरआई जैसे अनुसंधान संस्थान नवीन निर्माण सामग्री, ऊर्जा दक्ष भवनों और पर्यावरण अनुकूल निर्माण तकनीकों के विकास के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने तथा देश में सतत अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
समारोह के दौरान संस्थान के कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सम्मान पत्र, छात्रवृत्तियों एवं पुरस्कारों का वितरण किया गया। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण सीएसआईआर-सीबीआरआई द्वारा विकसित तीन तकनीकों का प्रौद्योगिकी हस्तांतरण रहा। इनमें ग्रेनाइट अपशिष्ट से उच्च-शक्ति वाले वोलराइज्ड पेवर ब्लॉक का निर्माण करने की तकनीक को एर. राजेश कुमार एवं श्री शहनवाज खान द्वारा M/s Anjalee Rocks Eco Crush Private Limited, आंध्र प्रदेश को हस्तांतरित किया गया। इसी क्रम में, निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट पर आधारित हल्के वजन वाले सेलुलर भवन उत्पादों की तकनीक को प्रो. एस. के. सिंह, डॉ. संथा कुमार, डॉ. गोविंद गौरव एवं एर. शिवम सोलंकी द्वारा M/s Prasagati AI Natural Resources Pvt. Ltd., गुरुग्राम को हस्तांतरित किया गया। इसके अतिरिक्त, क्रिस-क्रॉस ब्रिक सेटिंग तकनीक के माध्यम से आंतरिक ईंधन आधारित कम कार्बन फुटप्रिंट वाली पकी हुई मिट्टी की ईंटों के उत्पादन की तकनीक को डॉ. नीरज जैन एवं डॉ. सौमित्र मैती द्वारा M/s Euro Bricks India Pvt. Ltd., रेवाड़ी, हरियाणा को हस्तांतरित किया गया। इन तकनीकों का उद्देश्य अपशिष्ट संसाधनों के प्रभावी उपयोग, सतत निर्माण सामग्री को बढ़ावा देने तथा भवन निर्माण क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभाव और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में योगदान देना है। इसके अतिरिक्त, समारोह के दौरान सतत निर्माण एवं पर्यावरण अनुकूल भवन समाधानों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। पहले समझौता ज्ञापन का उद्देश्य प्लास्टिक अपशिष्ट का उपयोग करते हुए गैर-ऑटोक्लेव प्रक्रिया के माध्यम से सतत एवं हल्के वजन वाले चिनाई ब्लॉकों का विकास और पायलट स्तर पर सत्यापन करना है। यह समझौता M/s TAMA DHANSINRI Private Limited, नई दिल्ली के साथ किया गया, जिसमें सीएसआईआर-सीबीआरआई की ओर से डॉ. राजेश कुमार (प्रधान अन्वेषक), डॉ. मोहम्मद जीशान खान (सह-प्रधान अन्वेषक) तथा डॉ. विनीत कुमार सैनी, प्रमुख, पीएमई, शामिल हैं।
दूसरा समझौता ज्ञापन चीड़ की पत्तियों (पाइन नीडल्स) का उपयोग करके पर्यावरण अनुकूल इंटरलॉकिंग कंपोजिट ईंटों के माध्यम से सतत भवन निर्माण समाधान विकसित करने के लिए M/s Society for Promotion of Entrepreneurship and Resourcefulness (SPEAR), हिमाचल प्रदेश के साथ किया गया। इस परियोजना में सीएसआईआर-सीबीआरआई की ओर से डॉ. राजेश कुमार (प्रधान अन्वेषक), डॉ. सिद्धार्थ सिंह (सह-प्रधान अन्वेषक) तथा डॉ. विनीत कुमार सैनी, प्रमुख, पीएमई, योगदान देंगे। इन समझौता ज्ञापनों के माध्यम से अपशिष्ट आधारित निर्माण सामग्री के विकास, प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा सतत एवं पर्यावरण अनुकूल भवन निर्माण तकनीकों को प्रोत्साहन मिलेगा। इस अवसर पर संस्थान के दो महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इनमें वार्षिक रिपोर्ट 2025–26 का हिंदी संस्करण तथा भवनों के पुनर्वास एवं सुदृढ़ीकरण हेतु स्टील डेंटल बैंड तकनीक पर आधारित एक हैंडबुक शामिल हैं। हैंडबुक में इस तकनीक के कार्यान्वयन तथा उत्तराखंड, महाराष्ट्र और त्रिपुरा में इसके उपयोग से संबंधित जानकारी संकलित की गई है। ये प्रकाशन संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों, वैज्ञानिक उपलब्धियों एवं तकनीकी योगदान को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने तथा भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रभावी तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। समारोह के उपलक्ष्य में उसी संध्या एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्सव की गरिमा और उल्लास को और बढ़ाया जाएगा।
समारोह के अंत में श्री प्रदीप कुमार, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सीबीआरआई ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि सहित सभी गणमान्य अतिथियों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने वैज्ञानिक अनुसंधान, उपलब्धियों के सम्मान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से समाजोपयोगी नवाचारों को बढ़ावा देने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।
Ishwar Chandra reporter Sahara TV Roorkee Uttrakhand
